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नई विश्व व्यवस्था हर मनुष्य की गरिमा स्वीकार करने से शुरू होती है।

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साझा भविष्य की ज़िम्मेदारी से जुड़कर स्वतंत्रता सशक्त होती है।

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मनुष्य का जीवन, स्वास्थ्य और विकास हमारे निर्णयों का माप बनते हैं।

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ज्ञान सबके लिए खुला है; प्रौद्योगिकी सृजन और शांति की सेवा करती है।

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सहयोग लोगों को जोड़ता है, स्वतंत्र सोच
और संस्कृतियों की विविधता बनाए रखते हुए।

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जहाँ श्रम का मान हो और नियम सबको
स्पष्ट हों, वहाँ न्याय जन्म लेता है।

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पृथ्वी हमारा साझा घर है; उसकी कुशलता हमारे कर्मों पर निर्भर है।

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हम अतीत की विरासत सहेजकर भावी पीढ़ियों को जीवंत पृथ्वी सौंपते हैं।

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विश्वास सच्चे शब्दों, पारदर्शी निर्णयों और पूरे किए वादों से बढ़ता है।

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ज्ञान, श्रम और परस्पर सहायता से
हम मिलकर नई विश्व व्यवस्था रचते हैं।

